रांची : प्रवर्तन निदेशालय (ED) और झारखंड पुलिस के बीच उत्पन्न टकराव के बीच झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने पेयजल घोटाले के आरोपी संतोष कुमार द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर की जा रही पुलिस कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को पूर्ण सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने ईडी की ओर से दाखिल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि फिलहाल ईडी अधिकारियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस आदेश से उन ईडी अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है, जिनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस के आरोपी संतोष कुमार ने नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अदालत के निर्देश के बाद अब ईडी अधिकारियों और कार्यालय की सुरक्षा में सीमा सुरक्षा बल (BSF) की तैनाती की जाएगी।
ईडी ने मामले में शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने 16 जनवरी की तिथि निर्धारित की थी। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से अदालत को बताया गया कि पेयजल घोटाले की जांच के दौरान बड़े अधिकारियों की संलिप्तता से जुड़े अहम सबूत सामने आए हैं। ईडी का आरोप है कि संतोष कुमार द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को प्रभावित करना है।
सुनवाई के बाद न्यायालय ने पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी करते हुए संतोष कुमार की प्राथमिकी पर रोक लगा दी और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह ईडी अधिकारियों व कार्यालय की समुचित सुरक्षा सुनिश्चित करे।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि पीएचईडी कर्मी संतोष कुमार ने 12 जनवरी को ईडी द्वारा पूछताछ के बाद 13 जनवरी को रांची के एयरपोर्ट थाना में ईडी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। संतोष ने आरोप लगाया था कि ईडी कार्यालय में पूछताछ के दौरान उसके साथ मारपीट की गई, सिर फोड़ दिया गया और जान से मारने की धमकी दी गई।
इस प्राथमिकी की जांच के लिए गुरुवार को रांची पुलिस की टीम हिनू स्थित ईडी कार्यालय पहुंची थी और कार्यालय को घेरकर प्रारंभिक जांच, स्थल निरीक्षण और अधिकारियों से पूछताछ की थी। इसी पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए ईडी ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
हाईकोर्ट में ईडी की याचिका
प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका में संतोष कुमार की प्राथमिकी को निरस्त करने और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से ईडी को राहत मिली है और मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

