झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में वर्ष 1974-75 से लंबित भूमि सर्वे कार्य को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राजस्व विभाग की ओर से दाखिल शपथ पत्र पर आपत्ति दर्ज करते हुए राजस्व सचिव को स्वयं नया शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा कि पिछली सुनवाई में स्पष्ट रूप से राजस्व सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, ऐसे में अवर सचिव द्वारा शपथ पत्र दाखिल करना न्यायालय के आदेश का पालन नहीं माना जा सकता।

15 जुलाई तक शपथ पत्र, 21 जुलाई को अगली सुनवाई

खंडपीठ ने राजस्व सचिव को निर्देश दिया है कि वे 15 जुलाई तक भूमि सर्वे की प्रगति और अद्यतन तथ्यों के साथ नया शपथ पत्र दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।

इससे पहले भी हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि झारखंड के सभी जिलों में भूमि सर्वे का कार्य कब तक पूरा किया जाएगा और इसके लिए स्पष्ट समयसीमा बताई जाए।

1974-75 में शुरू हुआ था भूमि सर्वे

जनहित याचिका गोकुल चंद की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि झारखंड क्षेत्र में अंतिम व्यापक भूमि सर्वे वर्ष 1932 में हुआ था। इसके बाद वर्ष 1974-75 में नए भूमि सर्वे की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन लगभग पांच दशक बीत जाने के बावजूद यह कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है।

याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि सरकार को भूमि सर्वे पूरा करने के लिए निश्चित समयसीमा तय करने का निर्देश दिया जाए, ताकि लंबित प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके।

भूमि विवाद और फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक

याचिका में कहा गया है कि भूमि सर्वे पूरा होने से राज्य के भूमि अभिलेख अद्यतन होंगे। इससे जमीन के स्वामित्व, सीमांकन और भूमि की प्रकृति से जुड़े विवादों में कमी आएगी। साथ ही जमीन की खरीद-बिक्री और मालिकाना हक से जुड़े संभावित फर्जीवाड़े पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अद्यतन भूमि रिकॉर्ड होने से विकास परियोजनाओं, मुआवजा वितरण और राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

आधुनिक तकनीक से तेज किया जा रहा सर्वे

पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि भूमि सर्वे कार्य में तेजी लाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इसके तहत राज्य की तीन टीमों को बिहार, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक भेजा गया है, जहां वे आधुनिक भूमि सर्वे तकनीकों का अध्ययन कर रही हैं।

सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि इन तकनीकों को झारखंड में लागू कर सर्वे प्रक्रिया को गति दी जाएगी। अब तक लातेहार और लोहरदगा जिलों में भूमि सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि अन्य जिलों में यह प्रक्रिया जारी है। हाईकोर्ट ने सरकार से सभी जिलों में सर्वे पूरा करने की स्पष्ट समयसीमा और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

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