गुमला : झारखंड के गुमला से साल 2018 में लापता हुई 6 वर्षीय बच्ची के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सात साल बीत जाने के बाद भी बच्ची का कोई सुराग नहीं मिलने पर अदालत ने गहरी नाराजगी जताई है और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि बच्ची अब भी ट्रेसलेस है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए 2018 से अब तक गुमला में पदस्थापित रहे तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और जांच से जुड़े सभी अधिकारियों को तलब करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने जांच की धीमी गति पर सख्त टिप्पणी करते हुए केस डायरी का भी अवलोकन किया और कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए।
जांच पर उठे गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि मुख्य आरोपी का बयान अब तक दर्ज क्यों नहीं किया गया। इस पर पुलिस की ओर से बताया गया कि आरोपी के घर जाने पर बार-बार उसके बीमार होने की बात कही जाती रही।
कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि जब वर्ष 2020 में प्राथमिकी दर्ज हुई थी, तो उसी समय तेजी से कार्रवाई क्यों नहीं की गई। साथ ही पीड़िता की मां द्वारा जिन लोगों पर शक जताया गया था, उनसे समय पर पूछताछ न करने पर भी अदालत ने नाराजगी जताई।
एसआईटी की जांच और प्रयास
सरकार की ओर से बताया गया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की टीमों ने बच्ची की तलाश में मुंबई, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और जम्मू तक अभियान चलाया। बच्ची की तस्वीरें विभिन्न प्लेटफॉर्म पर साझा की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली।
हालांकि, इसी अभियान के दौरान कुछ अन्य लापता बच्चों को बरामद किया गया, लेकिन गुमला की इस बच्ची का कोई सुराग अब भी नहीं मिल सका है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह बच्ची सितंबर 2018 से लापता है। बच्ची की मां ने उसकी बरामदगी के लिए हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी। इससे पहले भी अदालत राज्य सरकार को जांच में प्रगति लाने के निर्देश दे चुकी है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई अहम मानी जा रही है। कोर्ट के सख्त रुख के बाद पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है, जबकि परिवार अब भी बच्ची के लौटने की उम्मीद लगाए बैठा है।

