रांची (झारखंड): राजधानी रांची के डोरंडा क्षेत्र में मंगलवार को अचानक सायरन बजने से इलाके में हलचल मच गई। दोपहर करीब 4 बजे एक इमारत से धुआं उठता दिखाई दिया, जिसके तुरंत बाद एनडीआरएफ (NDRF), फायर ब्रिगेड, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं। यह सब एक मॉक ड्रिल (आपातकालीन अभ्यास) का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य आतंकवादी हमले या युद्ध जैसी आपदा स्थिति में प्रशासन की तत्परता की जांच करना था।

डोरंडा में एनडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन – मॉक ड्रिल के दौरान सजीव अभ्यास

मॉक ड्रिल की शुरुआत मेकॉन परिसर (Mecon Campus) से की गई, जिसके बाद डोरंडा क्षेत्र में इसे सक्रिय रूप से क्रियान्वित किया गया। एनडीआरएफ की टीमों ने इमारत में ‘फंसे घायलों’ को निकाला, फायर ब्रिगेड ने ‘आग’ पर काबू पाया और प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

घटना स्थल पर जिला प्रशासन, सिविल डिफेंस, स्थानीय पुलिस, और स्वास्थ्य कर्मियों की संयुक्त उपस्थिति ने आपसी समन्वय और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को प्रदर्शित किया। इस दौरान जेसीबी और हैवी कटर मशीनों का भी इस्तेमाल किया गया।

रांची में क्यों हुआ मॉक ड्रिल? – पहलगाम आतंकी हमले के बाद बढ़ा सतर्कता स्तर

हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के मद्देनजर देशभर में अलर्ट जारी किया गया है। इसी संदर्भ में आपातकालीन मॉक ड्रिल्स पूरे झारखंड सहित देश के कई हिस्सों में आयोजित की जा रही हैं। डोरंडा में किया गया यह अभ्यास भी इसी श्रृंखला का हिस्सा था।

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जनसुरक्षा को लेकर यह एक रूटीन अभ्यास था, जिससे किसी भी वास्तविक आपदा की स्थिति में तेजी से और प्रभावी तरीके से कार्रवाई की जा सके।

रांची ट्रैफिक अलर्ट: मॉक ड्रिल के दौरान कई मार्ग अस्थायी रूप से बंद

मॉक ड्रिल के दौरान ट्रैफिक विभाग ने कुछ प्रमुख मार्गों को अस्थायी रूप से बंद किया और अन्य रास्तों पर डायवर्ट किया गया। आम लोगों से अपील की गई कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें।

सायरन की आवाज और टीमों की आपात गति से इलाके में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बना, लेकिन प्रशासन द्वारा लगातार लाउडस्पीकर से घोषणाएं (अनाउंसमेंट) की गईं कि यह एक मॉक ड्रिल है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

रांची में एनडीआरएफ और प्रशासन का समन्वय – आपात स्थिति से निपटने की तैयारियां

डोरंडा की यह मॉक ड्रिल दर्शाती है कि रांची प्रशासन आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों को लेकर गंभीर है। इसमें एनडीआरएफ के अलावा स्थानीय पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, एंबुलेंस सेवा, और सिविल डिफेंस की सहभागिता सराहनीय रही।

इस तरह के अभ्यासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रांची जैसे घनी आबादी वाले शहरों में आपात स्थिति में हर एजेंसी अपनी भूमिका सही तरीके से निभा सके। इस अभ्यास से यह भी परखा गया कि सामान्य नागरिकों को सुरक्षित निकालने, उन्हें प्राथमिक चिकित्सा देने और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है।

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