रांची : करोड़ों रुपये के कथित सरकारी फंड गबन और फर्जी बैंक खातों के जरिए धन के दुरुपयोग मामले में सीआईडी की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। सीआईडी थाना कांड संख्या 43/2024 से जुड़े इस मामले में जांच एजेंसी ने बैंक खातों, केवाईसी दस्तावेजों, बैंक अधिकारियों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की है।
संदिग्ध खाते में ट्रांसफर हुए करोड़ों रुपये
जांच के दौरान सामने आया है कि झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज मास्टर ट्रस्ट से जुड़े करोड़ों रुपये संदिग्ध तरीके से दूसरे खातों में ट्रांसफर किए गए। रिकॉर्ड के अनुसार, 30 सितंबर 2024 को करीब 9 करोड़ रुपये कैनरा बैंक की एनआईएफएफटी शाखा स्थित एक संदिग्ध खाते में जमा किए गए थे।
बताया गया कि इस असामान्य लेनदेन की जानकारी बैंक अधिकारियों ने अपने उच्च अधिकारियों को दी थी, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई।
फर्जी दस्तावेजों से बैंक खाता खोलने का आरोप
सीआईडी की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के नाम पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बैंक खाता खोला गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, उक्त खाते से कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन किए गए और रकम को अलग-अलग माध्यमों से निकाला गया। मामले की तह तक पहुंचने के लिए सीआईडी ने बैंक रिकॉर्ड, फिक्स्ड डिपॉजिट दस्तावेज, मोबाइल नंबरों और केवाईसी प्रक्रिया की जांच की।
बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ
जांच में यह भी सामने आया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बिरसा चौक शाखा में करोड़ों रुपये की कई फिक्स्ड डिपॉजिट योजनाओं से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं।
मामले में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई। जांच के दौरान कई दस्तावेज कथित रूप से फर्जी और मनगढ़ंत पाए गए।
सीआईडी ने केस डायरी में दर्ज गवाहों के बयान, बैंक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। एजेंसी का कहना है कि आरोपियों ने कथित साजिश के तहत फर्जी बैंक खाते खोलकर धन गबन की योजना बनाई थी।
कारोबारी की भूमिका भी जांच के घेरे में
सीआईडी जांच में कारोबारी श्रवण कुमार शर्मा की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है। केस डायरी के अनुसार, जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर फर्जी खाते के लिए केवाईसी प्रक्रिया में सहयोग किया।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के कथित स्वीकारोक्ति बयान का भी उल्लेख किया है, जिसमें फंड गबन में संलिप्तता की बात कही गई है।
सीआईडी ने अदालत को बताया कि मामले में उपलब्ध गवाहों के बयान और बैंकिंग दस्तावेज प्रथम दृष्टया गंभीर वित्तीय अनियमितता और आपराधिक साजिश की ओर संकेत करते हैं। फिलहाल मामले में आगे आरोप गठन की प्रक्रिया जारी है।
