नर्मदापुरम: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में सड़क निर्माण के दौरान प्राचीन सिक्के मिलने की खबर ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। केसला थाना क्षेत्र में सड़क खुदाई के दौरान करीब 100 पुराने सिक्के मिलने का दावा किया जा रहा है। हालांकि अब तक पुलिस के पास केवल तीन सिक्के ही जमा कराए गए हैं, जबकि शेष 97 सिक्कों का कोई पता नहीं चल पाया है।
मामले के सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। साथ ही सिक्कों के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेजने की तैयारी की जा रही है।
सड़क खुदाई के दौरान मिला सिक्कों का ढेर
पुलिस के अनुसार ग्राम केसला में सड़क निर्माण कार्य के लिए खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान मजदूरों को जमीन के अंदर किसी कठोर वस्तु से टकराने की आवाज सुनाई दी। जब उस स्थान की मिट्टी हटाई गई तो वहां पुराने सिक्कों का संग्रह दिखाई दिया।
सिक्के मिलने की खबर कुछ ही देर में आसपास के क्षेत्रों में फैल गई। इसके बाद मौके पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए और कई लोगों ने सिक्कों को अपने कब्जे में ले लिया। इस दौरान कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति भी बन गई।
1907 और 1940 के बताए जा रहे हैं सिक्के
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मिले सिक्कों पर 1907 और 1940 की तारीख अंकित बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि वर्ष 1907 के सिक्के ब्रिटिश शासनकाल के दौरान इंग्लैंड के सम्राट एडवर्ड के समय के हैं, जबकि 1940 के सिक्के जॉर्ज षष्ठ के शासनकाल से जुड़े बताए जा रहे हैं।
इन सिक्कों की वास्तविक ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्ता का निर्धारण विशेषज्ञों की जांच के बाद ही हो सकेगा।
97 सिक्कों की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस के पास अब तक केवल तीन सिक्के जमा कराए गए हैं। वहीं दावा किया जा रहा है कि खुदाई के दौरान करीब 100 सिक्के मिले थे। ऐसे में पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कुल कितने सिक्के बरामद हुए थे और उन्हें किन-किन लोगों ने अपने पास रख लिया।
जानकारी के अनुसार सिक्के करीब 25 से अधिक लोगों के हाथ लगे हैं। पुलिस संबंधित लोगों की पहचान कर सिक्कों को वापस जमा कराने की कोशिश कर रही है।
एएसआई करेगी सिक्कों की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए बरामद सिक्कों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेजा जाएगा। विशेषज्ञ उनकी आयु, ऐतिहासिक महत्व और प्रामाणिकता की जांच करेंगे।
प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ये सिक्के किस कालखंड से संबंधित हैं और उनका वास्तविक ऐतिहासिक मूल्य क्या है।

