सरायकेला-खरसावां : कुचाई प्रखंड के सियाडीह गांव में किसान कृषि सुरक्षा समिति पटायता (सियाडीह) के तत्वावधान में भव्य छऊ नृत्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में खरसावां विधानसभा क्षेत्र के विधायक दशरथ गागराई मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि समाजसेवी बासंती गागराई विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, संस्कृति प्रेमियों और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। आयोजन ने क्षेत्र की समृद्ध लोक परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान देने का कार्य किया।
छऊ कलाकारों की शानदार प्रस्तुति ने मोहा मन
कार्यक्रम स्थल पर अतिथियों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया। इसके बाद विभिन्न छऊ दलों के कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों और कलाकारों के सशक्त अभिनय ने पूरे माहौल को सांस्कृतिक रंग में रंग दिया। कलाकारों ने विशेष रूप से मानभूम शैली के छऊ नृत्य की प्रस्तुति देकर अपनी कला और प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना जरूरी : दशरथ गागराई
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि छऊ नृत्य झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कलाकारों की प्रतिभा की सराहना करते हुए आयोजन समिति के प्रयासों की प्रशंसा की और कहा कि ऐसे आयोजन स्थानीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ रहे ऐसे आयोजन
समाजसेवी बासंती गागराई ने कहा कि छऊ नृत्य जैसे पारंपरिक कला रूप हमारी पहचान हैं। ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम युवाओं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं।
उन्होंने छऊ कलाकारों को प्रोत्साहित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि लोक कलाओं के संरक्षण के लिए समाज को आगे आना चाहिए।
देर रात तक चला सांस्कृतिक उत्सव
कार्यक्रम में धर्मेंद्र सिंह मुंडा, करम सिंह मुंडा समेत गांव के कई गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। अतिथियों ने कलाकारों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए किसान कृषि सुरक्षा समिति पटायता (सियाडीह) द्वारा संस्कृति संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की।
छऊ नृत्य और लोक संस्कृति से सराबोर यह आयोजन देर रात तक उत्साहपूर्ण वातावरण में जारी रहा और दर्शकों ने कलाकारों का तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया।

