रांची : झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। 23 पदों के लिए मतगणना पूरी हो चुकी है और अब जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक अधिसूचना अगले सप्ताह जारी होने की संभावना है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी जस्टिस अंबुज नाथ ने सभी 23 विजयी उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करते हुए इसकी अधिसूचना जारी करने के लिए फाइल विधि विभाग को भेज दी है। अधिसूचना जारी होते ही चुनाव प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी।
महेश तिवारी मामले के कारण रुकी थी प्रक्रिया
बार काउंसिल चुनाव की प्रक्रिया में देरी की सबसे बड़ी वजह उम्मीदवार महेश तिवारी से जुड़ा मामला रहा। जानकारी के अनुसार, एक महिला वकील से दुर्व्यवहार के मामले में अदालत ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी। खास बात यह रही कि यह फैसला उस समय आया जब मतगणना जारी थी और महेश तिवारी जीत के लिए जरूरी मत हासिल कर चुके थे।
सजा की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित महिला वकील ने बार काउंसिल में इसकी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने महेश तिवारी की उम्मीदवारी रद्द करने का फैसला लिया।
प्रयाग महतो को घोषित किया गया विजेता
महेश तिवारी की उम्मीदवारी निरस्त होने के बाद प्रयाग महतो को निर्वाचित घोषित किया गया। हालांकि, इस फैसले को महेश तिवारी ने चुनौती देते हुए उच्च स्तरीय कमेटी में याचिका दायर की थी।
कमेटी ने मामले की सुनवाई के बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के फैसले को सही ठहराया और चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। इसके बाद अब सभी 23 विजयी उम्मीदवारों के नाम अधिसूचना जारी करने के लिए विधि विभाग को भेज दिए गए हैं।
अधिसूचना के बाद पूरी मानी जाएगी प्रक्रिया
बार काउंसिल नियमों के अनुसार अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी मानी जाएगी। इसके बाद बार काउंसिल की ओर से सभी जिला बार संघों को निर्वाचित सदस्यों की सूची भेजी जाएगी।
कानूनी गलियारों में अब अधिसूचना जारी होने का इंतजार है, ताकि नई बार काउंसिल टीम आधिकारिक रूप से अपना कार्यभार संभाल सके।
महिलाओं की भागीदारी पर भी जोर
इस बार बार काउंसिल चुनाव में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर भी विशेष ध्यान दिया गया है। चुनाव में पांच सीटें महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रखी गई हैं। इसके अलावा दो महिला सदस्यों का चयन मनोनयन के जरिए किया जाएगा।
कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि इससे बार काउंसिल में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व मजबूत होगा।

