सरायकेला: सरायकेला स्थित इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेशन में शुक्रवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ हुआ। इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘जीएसटी सुधारों का ग्रामीण और शहरी आजीविका व रोजगार पर प्रभाव’ रखा गया है।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन सेंट्रल जीएसटी कमिश्नर बीके गुप्ता, सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष मानव केडिया, नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी और मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. केबी सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
‘जीएसटी सुधार 2.0’ से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
मुख्य अतिथि बीके गुप्ता ने अपने प्रस्तुतीकरण में बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद जटिल कर प्रणाली से राहत मिली है। ‘जीएसटी सुधार 2.0’ के तहत दवाओं और पाठ्य सामग्री जैसी आवश्यक वस्तुओं को कर मुक्त किया गया है।
उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर पर जीएसटी दर घटाकर 5 प्रतिशत करने से ग्रामीण क्षेत्रों में मशीनीकरण बढ़ा है, जिससे कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। साथ ही दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कर में राहत से आम लोगों की क्रय शक्ति भी बढ़ी है।
लॉजिस्टिक लागत में कमी और पारदर्शिता में वृद्धि
मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. केबी सिंह ने कहा कि जीएसटी ने देश के विकास को गति दी है। इससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आई है और विभिन्न राज्यों के कर ढांचे की जटिलताओं से उद्योगों को राहत मिली है।
विशेषज्ञों ने दिए सुझाव
विशिष्ट अतिथि मानव केडिया ने छात्रों से क्षेत्रीय विकास में योगदान देने की अपील की। वहीं मनोज चौधरी ने पंचायत स्तर पर जीएसटी से जुड़ी जानकारी के प्रसार के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने का सुझाव दिया।
शोध और शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण पहल
कॉलेज के निदेशक आरएन महांती ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि सम्मेलन की संयोजक प्रो. डॉ. शुक्ला महांती ने इसे शोध और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम का समापन प्राचार्य डॉ. स्वीटी सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
तकनीकी सत्रों में शोध पत्र प्रस्तुत
सम्मेलन के पहले दिन तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शहरी रोजगार और डिजिटल बुनियादी ढांचे से जुड़े विषयों पर देशभर से आए प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
इस दो दिवसीय सम्मेलन को शोध, शिक्षा और आर्थिक नीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।

