फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री नियुक्ति पर अदालत की सख्ती

रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (FSL) में निदेशक, सहायक निदेशक और वरीय वैज्ञानिक समेत अन्य महत्वपूर्ण पदों पर अब तक नियुक्ति नहीं होने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) को निर्देश दिया है कि वह इन पदों की नियुक्ति प्रक्रिया पर विस्तृत जवाब दाखिल करे।

न्यायमूर्ति की खंडपीठ में हुई सुनवाई

यह मामला झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस रंगोंन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि FSL निदेशक और अन्य वैज्ञानिक पदों की नियुक्ति अब तक क्यों नहीं की गई और इस संबंध में JPSC की ओर से जवाब दाखिल करने में देरी क्यों हो रही है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 8 अक्टूबर निर्धारित की है और तब तक आयोग को प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

रिपोर्ट में देरी से प्रभावित हो रहे आपराधिक मामले

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री से रिपोर्ट आने में लगातार देरी हो रही है। वर्तमान में निदेशक कामचलाऊ व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं, जबकि सहायक निदेशक और वरीय वैज्ञानिक के पद लंबे समय से खाली हैं।

इस कारण कई मामलों में जांच रिपोर्ट समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे आपराधिक अपीलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है।

याचिका के दौरान सामने आया मामला

यह मुद्दा तब उठा जब अदालत में हरि महतो उर्फ रोहित महतो की आपराधिक अपील याचिका पर सुनवाई चल रही थी। मामले के दौरान यह तथ्य सामने आया कि FSL की रिपोर्ट देर से आने के कारण न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

इसी आधार पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) को प्रतिवादी बनाया और नियुक्तियों की अद्यतन स्थिति पेश करने का आदेश दिया।

कई पद अब भी रिक्त

जानकारी के अनुसार, FSL में निदेशक और सहायक निदेशक के अलावा कई वैज्ञानिक पद वर्षों से खाली हैं। अदालत का मानना है कि यदि समय पर नियमित नियुक्ति की जाती तो फोरेंसिक जांच और अपराधों की विवेचना में तेजी आती।

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