रांची : झारखंड की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। राज्य के वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक  राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश  पर तीखा हमला बोला है। इस बार विवाद JTET भाषा विवाद और उस पर पार्टी के स्पष्ट रुख को लेकर उठी चुप्पी से जुड़ा है।

वित्त मंत्री ने सवाल उठाया कि JTET भाषा विवाद पर बनी कमिटी की बैठक हो चुकी है, लेकिन अब तक कांग्रेस का आधिकारिक स्टैंड स्पष्ट नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जब पार्टी का रुख ही तय नहीं है, तो निर्णय प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी।

पार्टी के रुख पर उठाए सवाल

राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि ऐसी स्थिति में वह और मंत्री दीपिका पांडे सिंह  अपने विवेक से कमिटी के सामने पार्टी का पक्ष रख सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व से बार-बार रुख स्पष्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

उन्होंने आरोप लगाया कि जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रदेश नेतृत्व चुप्पी साधे हुए है।

कांग्रेस सिर्फ सत्ता की राजनीति नहीं करती : किशोर

वित्त मंत्री ने कहा कि कांग्रेस केवल सत्ता की राजनीति नहीं करती, बल्कि जनसेवा उसकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्रीहेमंत सोरेन का निर्णय अंतिम होता है, लेकिन एक राजनीतिक दल के रूप में कांग्रेस की अपनी राय होना जरूरी है।

अपने ऊपर लग रहे ‘पुत्रमोह’ के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि उनका बेटा संगठन के लिए मेहनत कर रहा है तो उसे केवल नाम के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

संगठन और परिवारवाद पर भी सवाल

राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी की संरचना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए इसे “जम्बोजेट कमेटी” बताया और कहा कि अगर संगठन इतना मजबूत है तो आगामी चुनावों में बेहतर परिणाम दिखने चाहिए।

उन्होंने नगर निकाय चुनाव के नतीजों का जिक्र करते हुए संगठन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए। उनके इस बयान के बाद झारखंड कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।


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