रांची : जल जीवन मिशन 2.0 के तहत झारखंड सरकार और केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के बीच मंगलवार को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन झारखंड मंत्रालय से ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए। समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने की।
इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना, झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद, जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के प्रतिनिधि तथा केंद्र और राज्य सरकार के कई अधिकारी उपस्थित रहे।
हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हुआ यह समझौता आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 से केंद्र सरकार हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है और झारखंड सरकार भी मिशन मोड में इस योजना को राज्य के प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की भौगोलिक परिस्थितियां और वन क्षेत्रों में फैली ग्रामीण आबादी योजना के क्रियान्वयन को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। कई बार विभिन्न विभागों और संस्थाओं से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में विलंब के कारण परियोजनाओं की गति प्रभावित होती है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से इस समस्या के समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।
जल सहियाओं को केंद्र से सहयोग देने की मांग
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने पेयजल व्यवस्था के संचालन के लिए लगभग 30 हजार जल सहियाओं की नियुक्ति की है। इन जल सहियाओं को राज्य सरकार की ओर से प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से जल सहियाओं के मानदेय के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने और जल जीवन मिशन में जल सहिया घटक को शामिल करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने उठाए कई महत्वपूर्ण मुद्दे
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2019-20 से राज्य में जल जीवन मिशन के तहत 24,635 करोड़ रुपये की लागत वाली पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने मल्टी विलेज और सिंगल विलेज योजनाओं के प्रभावी संचालन पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को अवगत कराया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में अब तक केंद्र से पर्याप्त राशि जारी नहीं की गई है। मुख्यमंत्री ने लंबित केंद्रांश राशि शीघ्र जारी करने का आग्रह करते हुए कहा कि राज्य की लगभग 55 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि केंद्र से केवल 46 प्रतिशत अनुदान प्राप्त हुआ है। उन्होंने करीब 6,500 करोड़ रुपये की लंबित सहायता राशि जारी करने की मांग की।
झारखंड को 2500 करोड़ रुपये का विशेष आवंटन
समारोह के दौरान झारखंड के लिए 2,500 करोड़ रुपये के विशेष आवंटन का उल्लेख किया गया। साथ ही राज्य को जल जीवन मिशन 2.0 के मानकों और दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने की सलाह दी गई।
जिलाधिकारियों को परियोजनाओं की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा झारखंड जल जीवन मिशन के प्रबंध निदेशक पद पर संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति की सिफारिश भी की गई।
कार्यक्रम का समापन जल जीवन मिशन 2.0 के दिशा-निर्देशों के शीघ्र क्रियान्वयन और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही पेयजल परियोजनाओं को तेज गति से पूरा करने के संकल्प के साथ हुआ।

