गुमला : करीब 25 वर्षों से पुलिस के लिए चुनौती बने कुख्यात अपराधी रामदेव उरांव ने आखिरकार आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। लंबे समय से फरार चल रहे रामदेव उरांव के सरेंडर को पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी, गोलीबारी और आगजनी समेत कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रामदेव उरांव की लंबे समय से तलाश की जा रही थी। बताया जाता है कि उसके खिलाफ विभिन्न थानों में दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं और वह वर्षों से कानून की पकड़ से बाहर था।
पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद लिया फैसला
जानकारी के मुताबिक, लगातार पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा एजेंसियों के बढ़ते दबाव के कारण रामदेव उरांव ने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया। पिछले कुछ समय से पुलिस उसके नेटवर्क को कमजोर करने और उसके सहयोगियों पर कार्रवाई करने में जुटी हुई थी।
इसी दौरान उसने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई और अंततः पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया।
वर्ष 2002 से आपराधिक गतिविधियों में था सक्रिय
रामदेव उरांव का नाम लंबे समय से गुमला और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का पर्याय माना जाता रहा है। बताया जाता है कि वह वर्ष 2002 के आसपास से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय था और क्षेत्र में उसका प्रभाव बना हुआ था। उसके खिलाफ कई थानों में गंभीर प्रकृति के मामले दर्ज हैं।
पूछताछ में खुल सकते हैं कई राज
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आत्मसमर्पण के बाद पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। उसके नेटवर्क, सहयोगियों और पुराने मामलों से जुड़े कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के जरिए कई लंबित मामलों की जांच में भी मदद मिलेगी और अपराध से जुड़े कई पहलुओं का खुलासा हो सकेगा।
लोगों ने ली राहत की सांस
रामदेव उरांव के आत्मसमर्पण के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लंबे समय से उसके नाम का भय बना हुआ था। अब लोगों को उम्मीद है कि इलाके में कानून व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा शांति और सुरक्षा का माहौल कायम रहेगा।

