Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर रिव्यू याचिका को खारिज करते हुए बोकारो के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (DLAO) पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने याचिका को तुच्छ बताते हुए संबंधित अधिकारी पर एक लाख रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना ठोक दिया है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि यह रिव्यू याचिका केवल अवमानना कार्यवाही से बचने के उद्देश्य से दायर की गई थी। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि राज्य सरकार के अधिकारियों ने 455 दिनों की अत्यधिक देरी के बाद यह याचिका दाखिल की, वह भी तब, जब जमीन मालिकों ने पूर्व आदेश के अनुपालन न होने पर कंटेम्प्ट केस दायर किया।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि बोकारो के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी दो सप्ताह के भीतर अपनी जेब से एक लाख रुपये की राशि जमीन मालिक लखी बाउरी को भुगतान करें। अदालत ने चेतावनी दी कि तय समय-सीमा के भीतर जुर्माने की राशि नहीं दी गई, तो मामले को संबंधित खंडपीठ के समक्ष रिपोर्ट किया जाएगा।
यह मामला बोकारो जिले के मौजा राधानगर की करीब दो एकड़ जमीन से जुड़ा है। वर्ष 1988-89 में यह जमीन अनुसूचित जाति के लाभार्थी लखी बाउरी को सरकारी योजना के तहत आवंटित की गई थी। बाद में इसी भूमि को रेलवे साइडिंग और डिपो निर्माण के लिए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) को हस्तांतरित कर दिया गया, लेकिन जमीन मालिक को मुआवजा नहीं दिया गया।
राज्य सरकार ने अदालत में यह दलील दी कि उक्त भूमि गैर मजरुआ थी और BPCL द्वारा जमा किए गए 91.13 लाख रुपये मुआवजा नहीं, बल्कि सलामी और लगान थे। हाईकोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जब BPCL मुआवजे के समकक्ष राशि राज्य सरकार के पास जमा करा चुकी है, तो यह राज्य का दायित्व है कि वह राशि वास्तविक भूमि स्वामी को प्रदान करे।

