Jamshedpur : जमशेदपुर के प्रतिष्ठित कारोबारी देवांग गांधी के बेटे कैरव गांधी के अपहरण को आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। जांच में सामने आए इनपुट के आधार पर पुलिस को आशंका है कि यह अपहरण बिहार के औरंगाबाद के कुख्यात अपराधी अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिंह के गिरोह की साजिश हो सकता है।
जेल से नेटवर्क चला रहा है अजय सिंह
सूत्रों के मुताबिक, अजय सिंह फिलहाल गया में चर्चित डॉक्टर दंपती अपहरण मामले में जेल में बंद है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि वह जेल के भीतर से ही अपने गिरोह का संचालन कर रहा है। जमशेदपुर पुलिस जल्द ही उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।
VIP किडनैपिंग में माहिर है गिरोह
अजय सिंह के गिरोह का इतिहास बेहद शातिर और हाई-प्रोफाइल वारदातों से जुड़ा रहा है। गिरोह के सदस्य अक्सर:
- पुलिस की वर्दी पहनकर
- नीली-लाल बत्ती लगी गाड़ियों का इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह करते हैं।
अपहरण के बाद पीड़ित को नशीले इंजेक्शन देकर बेहोश कर दिया जाता है, ताकि उसे ठिकाने की जानकारी न हो सके।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह गिरोह आमतौर पर अपहरण के 8–10 दिन बाद संपर्क करता है और 5 से 20 करोड़ रुपये तक की फिरौती मांगता है।
2003 में जयपुर की सुमेधा दुर्लभजी और 2015 में गया के डॉक्टर दंपती का अपहरण इस गिरोह के बड़े मामलों में शामिल रहा है।
बुंडू टोल प्लाजा के बाद गायब हुई स्कॉर्पियो
जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि अपहरण में इस्तेमाल की गई “पुलिस” लिखी सफेद स्कॉर्पियो आखिरी बार बुंडू टोल प्लाजा पर देखी गई थी। इसके बाद वाहन का कोई सुराग नहीं मिला।
पुलिस का अनुमान है कि अपराधी कैरव गांधी को लेकर लोहरदगा–गढ़वा मार्ग से उत्तर प्रदेश या औरंगाबाद की ओर निकल गए होंगे।
अब तक का पूरा घटनाक्रम
- 13 जनवरी: कदमा–सोनारी लिंक रोड से कैरव गांधी का अपहरण
- कुछ समय बाद सरायकेला के कांदरबेड़ा में उनकी कार लावारिस हालत में बरामद
- इसके बाद पिता देवांग गांधी को फिरौती के लिए कॉल
- 8 दिन बाद भी कैरव का कोई सुराग नहीं
पुलिस और STF अलर्ट मोड में
फिलहाल जमशेदपुर पुलिस और STF की टीमें सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अजय सिंह गिरोह के सदस्यों की तलाश में जुटी हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस हाई-प्रोफाइल अपहरण मामले में बड़ा खुलासा किया जाएगा।

